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छल Cheating Deceit

छल और प्रेम दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों ही बहुत सुंदर व क्रूर हैं लेकिन जो दोनों में फर्क रह जाता है वह फर्क है स्वार्थ और निस्वार्थ भाव का
  निस्वार्थ भाव से किया गया छल - छलिया मोहन के जैसा है जो हमारे दिल को प्रेम से भर देता है। 
 कई बार बिल्कुल इसी तरह हमारे छोटे बच्चे भी हमें कई बार मूर्ख बना जाते हैं छल लेते हैं लेकिन उनका यह छलना हमें मूर्ख बनाना हमें और प्रेम से भर देता है- अपने बच्चों की मासूमियत के पीछे उनका नटखट पन उनका हमें मूर्ख बना देना इस मूर्खता में भी हम आनंदित हो जाते हैं - यह छल होने के बावजूद भी छल नहीं है प्रेम का रूप है ☺️ 

स्वार्थी भाव से किया गया छल - यह बिल्कुल दुर्योधन के जैसा है कैकई के जैसा है मंथरा के जैसा है रावण के जैसा है और इस कलयुग के दौर में कयामत के दौर में यह छल का दूसरा रूप ही अधिकतर सामने नजर आता है -  स्वार्थ और निस्वार्थ भाव में किया गया छल दोनों ही देखने में मासूमियत से भरपूर दिखते हैं लेकिन जहां निस्वार्थ रूपी किया गया छल प्रेम में बदल जाता है वही स्वार्थ रूपी किया गया छल पाप में ✍️

जिंदगी में आप भी कभी ना कभी छल के शिकार हुए होंगे और मेरे पास बहुत से लोग ऐसे भी आते हैं जिनके दिल में यही पीड़ा होती है कि वह छल के शिकार हो गए हैं। जिंदगी में मैं भी कई बार छल का शिकार हुआ पीड़ा हुई लेकिन स्थाई रूप पर नहीं बिल्कुल ही टेंपरेरी जैसे कि पानी की लकीर या फिर रेत की लकीर 
 छल आपको दुखी तभी करता है जब आपने बहुत सारी उम्मीदें लगाई हो आपके साथ छल के साथ-साथ आपकी उम्मीदों का भी कत्ल हो जाता है- तो यह दर्द आपको जिंदगी भर आपके सीने में आपको तकलीफ देता है।

 लेकिन मैंने कभी भी कोई उम्मीद नहीं लगाई उम्मीद सिर्फ एक परमपिता परमात्मा परवरदिगार मालक से है। मेरे सीने में यह अलख भी शायद उसी मालिक ने जगाई होगी परमपिता परमात्मा ने - शायद इसी वजह से कभी भी मैं छल की वजह से बहुत ज्यादा समय तक परेशान नहीं हो पाया या यूं कहें ना उम्मीदें थी ना उम्मीदों का कत्ल हुआ-  जब डोरी परमात्मा के हाथ में हो उसके साथ कोई भी उसे छल करके तकलीफ नहीं पहुंचा सकता।
  इसीलिए आप सतगुरु तेग बहादुर साहब जी वचन करते हैं 
     संग सखा सब तज गए कोई ना निभियो साथ।
       कहु नानक इह विपत में टेक  एक रघुनाथ।।

इसीलिए मौज लो रोज लो नहीं मिले तो खोज लो आनंदित रहो बेकार की उम्मीद दुनिया से नहीं बल्कि दीन धर्म से लगा कर रखो परमपिता परमात्मा से - टेक एक रघुनाथ 👣🌺🙏

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